Wednesday, July 04, 2012

जिंदा


बढती हुई इमारतें
पथरीली शुष्क इबादतें
जगती बेजान सड़क
पेट्रोल के जिस्म की महक

हँसते हुए मशीन
चौराहे - धूमिल गमगीन;
स्वस्थ कचड़े का पहाड़,
नाले के उस पार

सांस लेते छल्ले
इश्क़ फरमाते दल्ले
Generators के ठहाके
Computers के इलाके

शहर में हर निर्जीव जिंदा है, पर
आदमी की आत्मा मर गयी

Monday, July 02, 2012


आत्माएं नहीं मरती हैं, ज़मीर को भी मत मारिये
इक दिन शांति फैलेगी, इतनी जल्दी मत हारिये

मिटटी घड़े बनाती है, कीचड़ पर पत्थर मत मारिये
सब सुधरेगा जग सुधरेगा, अपनी गलती भी सुधारिए

भारत माता की जय बोलो


आप अपने बच्चों को,
concrete की बड़ी दीवारें, बढ़िया सोफा, बढ़िया कारें,
ख़ूब पड़ोसना चाहते थें;
आप उनके blue collar पर,
IIT , IIM , MBBS की degree
चाँद सरीखे, हर रोज़ खोसना (tag) चाहते थें

आप उन्हें देश का मतलब bank बताकर,
ख़्वाब का मतलब rank बताकर
Imported AC की luxury में ढक कर भूल गए
और आपके बच्चे,
morality के lectures बस रट रट कर, school गयें
अब झुग्गी में आग लगाकर, पेट भरो, bank भरो
बेशर्मी से बस 'मैं' बोलो
भारत माता की जय बोलो
भारत माता की जय बोलो

'धप्पा'


मिलते रहते हैं हमशक्ल, अक्सर
ज़िन्दगी तू 'धप्पा' बोलना छोड़ती नहीं


कबूतर उड़ाने से शान्ति आ जाती दिल्ली में गर,
ये दरबार, क़ब्रगाह के दसतूर, बिकता नहीं फिर.

आम आदमी


आम आदमी,
तमाम आदमी
राशन की दुकान में खड़ा
पेट के लिए struggle करता गुमनाम आदमी;

इलेक्शन के पहले, बकरे के दाम आदमी
और इलेक्शन के बाद बनता हुआ, ज़ुकाम आदमी
कभी कुर्सी, कभी जाति, कभी भगवान् के नाम पर
मरता, कटता बदनाम आदमी

हिंदी लिखी नहीं जाती,
अंग्रेजी bottle से निगल जाता कई जाम आदमी
दोपहर में भटकता खोजता है,
परिवार की रात, परिवार की शाम ...आदमी
आम आदमी,
तमाम आदमी

Politics


विदर्भ में भयानक सूखा,
उड़ीसा, छत्तीसगढ़ में आकाल
बिहार में बाँध टूटी,
दिल्ली गंदे पानी से है बदहाल
बम्बई में रहने को जगह नहीं,
वहां, कश्मीर में पकता नहीं है दाल
कभी President पर बवाल
कभी पेस भूपति पर सवाल
किसी को दिखता है RSS का हाथ,
कोई बोलता है secularism की चाल
पूनम पांडे की ख़बर front page पर
RTI acticists की उधेर लीजिये खाल

महाराज, आपको चुना था नेता
मीडिया को बनाया था ढाल
आप दोनों ने हमें ही घोड़ा समझकर
हमपर ही ठोक दी नाल

हम चुनेंगे कठिन रस्ते, हम लड़ेंगे

हम चुनेंगे कठिन रस्ते जो भरे हो कंकड़ों और पत्थरों से  चिलचिलाती धूप जिनपर नोचेगी देह को  नींव में जिसके नुकीले काँटे बिछे हो  हम लड़ेंगे युद्...