Friday, February 01, 2008

रूठे हैं मुझसे नयना तेरे


रूठे हैं मुझसे नयना तेरे,
कैसे उनको मनाऊँ,
होकर खफा छिप गए हो तुम,
कैसे ढ़ूंढ़ के लाऊं;
रूठे हैं मुझसे नयना तेरे,
कैसे उनको मनाऊँ॥

बादल के पीछे बैठे हो तुम,
तारें मुझको चिधायें,
पतझड़ सी सूनी बगिया मेरी,
आशू कैसे छिपाउन
रूठे हैं मुझसे नयना तेरे,
कैसे उनको मनाऊँ,

तुम ही हो सुबह मेरे,
तुम शाम की झलक भी हो,
तेरे दर्द से बेचैन है दिल,
कैसे इसे समझाऊं,
रूठे हैं मुझसे नयना तेरे,
कैसे उनको मनाऊँ....








हम चुनेंगे कठिन रस्ते, हम लड़ेंगे

हम चुनेंगे कठिन रस्ते जो भरे हो कंकड़ों और पत्थरों से  चिलचिलाती धूप जिनपर नोचेगी देह को  नींव में जिसके नुकीले काँटे बिछे हो  हम लड़ेंगे युद्...