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Friday, September 18, 2009

बेतुके

दर्द की हँसी

वक्त के साथ साथ

मुरझा गई।


आंधी का पंजा

बहुत नुकीला था;

ज़ख्मी ढिबरी

काँप काँप कर हार गई।


झील के आंसू

बहते बहते सूख गए;

ज़ालिम पतझर,

पल्लव उसके कल नोंच गया।


तेरी चिट्ठी,

बारिश में वो पढता था ,

पिघले पन्ने अंगीठी में,

कल बुझे मिले ...


Wednesday, May 13, 2009

शिकायत




















जब कभी,
मेरे पैमाने में,
ख्वाइशों के कुछ बूंद छलक जाती हैं,
तुम्हारी यादों की खुशबू,
बहकी हुई हवाओं की तरह,
मेरे साँसों में बिखर जाती हैं,


मैं हर दायरे को भूल कर,
हर दरिये को लाँघ कर,
देर तक,
तुमसे सिफ़र से फलक तक की,
सारी बात करना चाहता हूँ;
हर नाजुक घड़ी को महफूज़ रख,
फिर से जीना चाहता हूँ;

और तुम्हारी ये शिकायत रहती है कि,
"उड़ान की आदत न डालो",
शाम ढलने पर, तकलीफ़ होती है...

हम चुनेंगे कठिन रस्ते, हम लड़ेंगे

हम चुनेंगे कठिन रस्ते जो भरे हो कंकड़ों और पत्थरों से  चिलचिलाती धूप जिनपर नोचेगी देह को  नींव में जिसके नुकीले काँटे बिछे हो  हम लड़ेंगे युद्...