कल देर तक,
चुपचाप सिमट कर बैठा रहा,
मैं आँगन में अपने;
हलकी सी मदहोशी थी,
और मीठी सी एक बेचैनी,
चाहत और मुस्कराहट की लुक्काछिपी,
और लफ़्ज़ो की खिचातानी।
शायद,
तेरे एहसास के ठंडे छीटें पड़े थे,
और रेशम के कुछ शब्द गिरे थें,
रूह पर मेरे।
सर्द धुंध का सफ़ेद परदा,
और उस पार तुम;
कभी अजनबी और कभी पुरानी पहचान वाली,
दिख रही थी...
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Saturday, May 09, 2009
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हम चुनेंगे कठिन रस्ते, हम लड़ेंगे
हम चुनेंगे कठिन रस्ते जो भरे हो कंकड़ों और पत्थरों से चिलचिलाती धूप जिनपर नोचेगी देह को नींव में जिसके नुकीले काँटे बिछे हो हम लड़ेंगे युद्...
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Y - What?... Philosophy ! You mean to say, you spent your whole graduation sitting near by the banks of Ganges, intoxicated in some damn fu...
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यूँ तो अक्सर, संवेदनाएं... हावी तुमपर रहती हैं, पर, इस शाम जन्मे, अपने बेचैनी के अनल में, मुझको चुपके झोंक देना; पन्नो में सिलवट पड़े तो, शब्...
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हम चुनेंगे कठिन रस्ते जो भरे हो कंकड़ों और पत्थरों से चिलचिलाती धूप जिनपर नोचेगी देह को नींव में जिसके नुकीले काँटे बिछे हो हम लड़ेंगे युद्...