Monday, July 02, 2012

पता नहीं क्यूँ


दिल्ली का तापमान,
ममता का स्वाभिमान
राहुल गाँधी की उमर
दहेज़ के संग कन्यादान

बढ़ रहे हैं, पता नहीं क्यूँ

जाति के नाम पर इंसान,
पानी के नाम पर किसान
सजदा करने वाले मौलवी
पुजारी, जिसे पता है भगवान्

लड़ रहे हैं, पता नहीं क्यूँ

बुजुर्गों के अनुभव की पोटली,
महर्षियों का समझाया गया ज्ञान
ग्रंथों में लिखी गयी संस्कृति
बच्चों में छिपा हुआ विज्ञानं

सड़ रहे हैं, पता नहीं क्यूँ

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तुम्हारे दीदार से मुक़म्मल होती थी वो कवितायेँ  जो आज कल अधूरी-अधूरी ही ख़त्म हो जाती हैं.