Thursday, September 15, 2011

Engineer सब कुछ होता है

कभी In, कभी जिन्न....और कभी Engine होता है
कभी "Gunda", कभी "Troy".. कभी "Original Sin" होता है
Engineer सब कुछ होता है

रात का आवारा परिंदा, दिन भर सोता है
कभी बच्चा, कभी फच्चा...और कभी नाक में दम होता है,
Engineer सब कुछ होता है

कभी मुह पर ताला, कभी भक साला रहता है,
चार-पाँच साल में उसने सब कुछ कर डाला होता है
कभी इश्क में उसकी आँखें नम, कभी वो Atom Bomb होता है
कभी "पापा कहते हैं" कभी "g*d में"दम" होता hai
Engineer सब कुछ होता है

Thursday, September 08, 2011

चीख


कौन सी परिभाषा से करूँ संतुष्ट, स्वं की आधारशिला
मशीनी चाहतो में, चिंगारियों में, भय - भूख में लिपटी 
मेरी आत्मा आज कुंठित है!

ख़ुदा को खोजने के वास्ते हजारों ईंट नोचे हैं,
मंदिर हवन की शान्ति में कितने खून पोछें हैं'
कभी क्रांतियों में सर कटा कर लौट आतें हैं, 
कभी लाठियों से बेवजह ही चोट खातें है.  

किसी लालटेन की रौशनी में दुबकी हुई
हमारी हर लड़ाई, बस बयानों तक सिमित है
और अस्तित्व की कल्पना, शायद
अगले धमाके तक जीवित है!


Tuesday, September 06, 2011

Lines नहीं सीधे हैं

कांधे पर तेरे ओस के शायद बूंद पड़े थें
या जुल्फों से जैसे,
कुछ सपने मेरी आँखों में छलक गए थें;
सब टेढ़ा मेढ़ा दिखता था,
तुमने बोला Lines नहीं सीधे हैं.

खुली दीवारों में,
आसमान के रंगों सी परतें
मानो बचपन हौले हौले झूल रही थी
तुमने बोला Lines नहीं सीधे हैं.

कभी मैं हँसता, 
कभी तुम हँसती
दो आईने सोच सोच कर सबकुछ भूल रहे थें
Icecream के टुकड़ों में 'कच्छ' भूली बातें
पिघल पिघल कर lawn में टेढ़े गिरते थें;
तुमने बोला Lines नहीं सीधे हैं.

दो आवारा, बंजारों से,
चाय की प्याली घोल रहे थें
सब टेढ़ा मेढ़ा दिखता था,
तुमने बोला Lines नहीं सीधे हैं.

इश्क़ मुहब्बत वाला लौंडा जब झंडा लेकर घूमने लगा

2012 के मई की चिलचिलाती गर्मी चीटियों की तरह शरीर पर चुभ रही थी| ज़मीन एक एक क़तरा पानी के लिए ललचाये निग़ाहों से आसमान की तरफ़ ताक रहा था, लेक...