Thursday, November 15, 2012

उस शहर में आशियाँ क्या ख़ाक बनायेंगे



उस शहर में आशियाँ क्या ख़ाक बनायेंगे
जिस शहर में झुग्गियों तले खून ना बहे

बुलडोज़रो से सपने कुचल दिए जाये जहाँ
गिद्ध को नाचते देखे बगैर सुकून ना रहे

शांति और सभ्यता तो दकियानूसी बाते हैं
कब्र है वो, जहाँ दरिंदगी का जूनून ना रहे

उस शहर में आशियाँ क्या ख़ाक बनायेंगे
जिस शहर में झुग्गियों तले खून ना बहे

ये "हम लोग" वाले लोग जब inert या blind हो जाते हैं तो स्थिति बहुत डरावनी हो जाती है|

एक और 15 अगस्त आने वाला है| बहुत कुछ वैसा ही होगा, जैसा हर साल होता है| Facebook और twitter पर profile picture बदल दिए जाएंगे; whatsapp पर ...