Friday, August 17, 2012

मुझको ऐसा ख्वाब चाहिए


मुझे जवाब चाहिए,
मुझे इंक़लाब चाहिए
रात को sensational news
चने के साथ शराब चाहिए

मुझे ख़िताब चाहिए
मुझे आदाब चाहिए
छिप कर करता रहूँ ज़ुर्म
मुझको ऐसा नक़ाब चाहिए

तुम्हारा कौम, मेरा धर्म
मुझे चेहरों तक का हिसाब चाहिए
धुंए से ढका शहर,
जलकर राख़ हो जाये
मुझको ऐसा ख्वाब चाहिए

क्या मुझको ऐसा ख्वाब चाहिए?

No comments:

Ugly

लोहा, लक्कड़, ताला, चक्कर घिच-पिच कर के बैठा है बाहर से चमचम करता है दिल अंदर से ugly है मौसम, पानी, सात समंदर गलियों गलियों घूमा है...