Wednesday, September 26, 2012

आस्मां तुम्हारा इंतज़ार कर रही है




मैंने जब चलना सीखा होगा
माँ की ऊँगली पकड़कर
धीरे धीरे,
तब मैं भी आकाश की तरफ ताकता हूँगा
आज़ाद पानी की तरह बहते हुए
पंछियों को देखकर
मैंने भी अपने आसमान का दायरा नापा होगा

मेरी कल्पना के गुब्बारे
घूमते होंगे - अलसाए
उन वाले भेड़ो की तरह पहाड़ों पर
कूदते होंगे - बेफ़िकर
गिलहरियों की तरह जंगलो में

बचपन पन्नों के ऊपर से धुलता गया
मैंने पेट की लालच में
ईंट से दोस्ती कर ली थी
अब ख़याल,
बासी चेहरों की तरह लटकते हुए पपड़ी बनकर
दीवारों पर उभर आते हैं
और उड़ान की बातें
चहारदीवारी के भीतर दम तोड़ देती है

बचपना बहुत कुछ सिखाता है 
आज़ाद बनो
पंछियों की उड़ान की तरह
आस्मां तुम्हारा इंतज़ार कर रही है


ये "हम लोग" वाले लोग जब inert या blind हो जाते हैं तो स्थिति बहुत डरावनी हो जाती है|

एक और 15 अगस्त आने वाला है| बहुत कुछ वैसा ही होगा, जैसा हर साल होता है| Facebook और twitter पर profile picture बदल दिए जाएंगे; whatsapp पर ...