Thursday, January 05, 2012

Woofing Chants

My lungs are swollen
The veins smell rotten
I have scratched my skin
to explore worthlessness

सच सच सच
ख़याल और विचार का स्वाद बहुत बेहूदा लगता है
किसी लकड़ी की कुर्सी पर बैठ कर
चाय पीने में जितना गला घुटता है, जितनी बेचैनी महसूस होती है
वैसा ही आज इन रास्तों को देख कर हो रहा है

I can't stare those yellow leafed dusky lanes
spread like my tongue dragged with husky veins
I have itched my socks, threads entangled in fingers
My nails stink like society

समाज, अकेलापन और फिर से समाज
शब्दों को नोच नोचकर स्याही बनाता हूँ
बड़ी बड़ी नशीली आँखें फिर स्याही में किरोसिन डालकर,
आग लगाती हैं
क्रांति, राख़ और फिर से क्रांति

कभी कभी
existence और non existence की absurdity ,
कान में जब  हथोड़ा मारती है
लगता है कि,
चीख़ कर फेफड़े और अतारियां सब निकल दूँ
पर एक escapist हूँ ना...
मरने से डरता हूँ


ये "हम लोग" वाले लोग जब inert या blind हो जाते हैं तो स्थिति बहुत डरावनी हो जाती है|

एक और 15 अगस्त आने वाला है| बहुत कुछ वैसा ही होगा, जैसा हर साल होता है| Facebook और twitter पर profile picture बदल दिए जाएंगे; whatsapp पर ...