Tuesday, September 25, 2012

दीमक


मेरे अन्दर एक दीमक है
वक़्त-बेवक्त
ख्यालों में सीलन लगने पर जाग जाता है
और धीरे धीरे चबाने लगता है
ख्वाइशों का एक एक पन्ना

जब पेट की भूख
सूखे पत्तों की तरह खड़ खड़ाने कर जलने लगती है,
तब
उसे शांत करने के लिए
समाज से बाल्टी भर पानी उधर ले आता हूँ
पानी सूंघते ही ख्यालों के जबड़ों में सीलन लग जाती है
दीमक जाग उठता है

1 comment:

yug said...

mast likhte ho ... :)

ये "हम लोग" वाले लोग जब inert या blind हो जाते हैं तो स्थिति बहुत डरावनी हो जाती है|

एक और 15 अगस्त आने वाला है| बहुत कुछ वैसा ही होगा, जैसा हर साल होता है| Facebook और twitter पर profile picture बदल दिए जाएंगे; whatsapp पर ...