Saturday, August 25, 2012

Innocence

तुम सान लेना रेत को 
मैं बांध लूँगा पेट को 
हम चाँद के किसी कोने पर,
रिश्ता जोड़ आयेंगे
रात भर ताकेंगे नीली रौशनी, धरती की 

ठेंगा दिखाकर दुनिया को
थोड़ी चांदनी 
ओढ़ आयेंगे 

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तुम्हारे दीदार से मुक़म्मल होती थी वो कवितायेँ  जो आज कल अधूरी-अधूरी ही ख़त्म हो जाती हैं.