Saturday, July 07, 2012

दिलशाद


मैं हिन्दू ना हुआ तो सही,
गंगा में दीया तो बहा सकता हूँ
दिवाली में पटाखों की चमक,
होली के गुलाल में तो नहा सकता हूँ

मैं मुसलमान ना हुआ तो सही,
ईद की सवैयाँ तो खिलाओगे मियां
जब चाँद देखकर ज़िया फैलेगी वादियों में
मेरी मुस्कान पर भी
दिलशाद तो हो जाओगे मियां

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