Saturday, May 05, 2012

चूहों को ज़हर देना ज़रूरी है

चूहों को ज़हर का डर ना हो तो,
क्रांति और इंक़लाब की बातें करने लगते हैं;
अचानक से किसी एक चूहे को
आज़ादी की भूख़ लग जाती है,
और उसकी भूख़ ख़ा जाती है, बाकी चूहों की सोच को


Physics जितना mass पर act करता है,
उतना ही सोच पर भी;
श्रृष्टि हर श्रृजन को अंडाकार बना देती है
ग्रहों को देखा है,
oval होते जाते हैं, और oval रस्ते पर घूमते जाते हैं;
सोच का भी वही खेल है.


एक चूहे की इन्क़लाबी सोच,
हज़ार चूहों को gravitationally pull करती है;
हवस का wave resonate करता है ,
फिर सब कुछ oval ही oval;
चूहे इन्क़लाबी हो जाते हैं.


Democracy में ज़हर देना जरूरी है
एक सिक्का, 
धीरे धीरे aluminium वाले पत्तों को पिघलाता रहता है 
hydrogen sulphate की तरह 
aluminium नहीं रहेगा, तो कटोरा कौन बनाएगा
भूख़ लगेगी तो क्रांति पनपेगी 
चूहों को ज़हर देना ज़रूरी है 

2 comments:

क्षितिजा .... said...

आपकी रचना भी क्रांतिकारी है ... नया प्रयोग देखने को मिला ... शब्दों और भाव के साथ ... अच्छी रचना है ... बधाई !!

crazy devil said...

dhanyawaad

इश्क़ मुहब्बत वाला लौंडा जब झंडा लेकर घूमने लगा

2012 के मई की चिलचिलाती गर्मी चीटियों की तरह शरीर पर चुभ रही थी| ज़मीन एक एक क़तरा पानी के लिए ललचाये निग़ाहों से आसमान की तरफ़ ताक रहा था, लेक...