Friday, June 05, 2009

तेरे किस्से भी ख़रीदे थे रे बन्दे













अंधी
गलियों में हज़ारों,
प्यासे चूल्हे जलते हैं;
भूखे कुँए में सभी बेआबरु घुट कर मरते है।

इंसान की फ़ितरत बता कर,
भीख को आदत सुना कर,
तुमने उनको ठुकरा दिया था,
तुमने सब झूठला दिया था।

तेरे किस्से भी ख़रीदे थे रे बन्दे,
तेरे ही दरबार से;

हकीक़त की आंधी में जब,
असूलो का चोला,तेरा ही
चूभा था तुझे और,
अंधेरे कुँए में,
डुबकी लगाकर,
तुम,
दुनिया की महफ़िल में शामिल हुए थे।

बेच आया,
तेरे सारे किस्से,
वक्त के बाज़ार में...

इश्क़ मुहब्बत वाला लौंडा जब झंडा लेकर घूमने लगा

2012 के मई की चिलचिलाती गर्मी चीटियों की तरह शरीर पर चुभ रही थी| ज़मीन एक एक क़तरा पानी के लिए ललचाये निग़ाहों से आसमान की तरफ़ ताक रहा था, लेक...