Monday, February 11, 2008

I need a spoon of love

ख्वाबो के धागों में लिपटे...सूने पड़े हैं,
तारों की टिम टिम में भी...चुप से खडें हैं,
आसूँ नही...बस आंखो से कह पातें हैं,
बंद कमरों में अकेले...अकेले रह जातें हैं।

कुछ मीठे आंसू , चाहत के चम्मच से पिलादो
प्यार की tonic का थोडा ..थोडा taste करा दो,
भूखे हैं पर..झूठे नही मेरे खिलौने ,
नटखट हैं पर... इतने बुरे भी नही...मेरे ये बौने

I feel the void
getting big,getting large..
I only need a spoon..spoon of love
no doubt

माँगो तो...piggie bank में जो भी है,
सब तुम्हारा है,
chalklate की आधी byte,
बिस्तरों में छुपाईथी जो kite,
जो भी माँगो...
बस तुम्हारा है।


बस....
कुछ मीठे आंसू , चाहत के चम्मच से पिलादो
प्यार की tonic का थोडा ..थोडा taste करा दो,

जानकर भी सब, क्यों नाराज़ बैठे हो,
नासमझ हूँ मैं..पर तुम न ऐसे हो,
यादों की चादर से कुछ लम्हे ला दो,
परियों की दुनिया की लोरी सुना दो...

कुछ मीठे आंसू , चाहत के चम्मच से पिलादो
प्यार की tonic का थोडा ..थोडा taste करा दो,


I feel the void
getting big,getting large..
I only need a spoon..spoon of love
no doubt

2 comments:

विकास कुमार said...

अच्छी है, बहुत अच्छी है.

VaRtIkA said...

hmmm.... bahut hi zyada acchi hai re... honest to teri har rachnaa hoti ahi, par yeh to jaise... kya kahoon.... ekdam maasoom... dard kaa atirek do hi cheezein kartaaa hai, yaa to humse humari saari aardataa cheen letaa hai , yaa phir usse saraaabor kar jaata hai.... gud dat the second is d case here...

ankhon ke koron se do boond aansu churaa lene waali rachnaa...

इश्क़ मुहब्बत वाला लौंडा जब झंडा लेकर घूमने लगा

2012 के मई की चिलचिलाती गर्मी चीटियों की तरह शरीर पर चुभ रही थी| ज़मीन एक एक क़तरा पानी के लिए ललचाये निग़ाहों से आसमान की तरफ़ ताक रहा था, लेक...